आम चुनाव और उप-चुनाव में अंतर

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नमस्कार… अंतरकोश में आपका स्वागत है। आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से आपको आम चुनाव और उप-चुनाव के बीच अंतर बताने जा रहें हैं। चुनावों से हर कोई परिचित है। देश के किसी न किसी हिस्से में अक्सर चुनाव होते रहते हैं। कभी आम चुनाव होते हैं, तो कभी उप-चुनाव होते हैं। लेकिन अक्सर लोग आम चुनाव और उप-चुनाव को लेकर भ्रमित रहते हैं। उन्हें समझ नहीं आता कि आम चुनाव और उप-चुनाव क्या हैं और इनमें क्या अंतर है? आज हम इस आर्टिकल में इसी अन्तर को बता रहे हैं। अच्छे से समझने के लिये आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें.।

किसी भी देश में चुनाव उस देश की लोकतंत्रिक प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्से होते हैं। चुनाव लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसके द्वारा जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है। चुनाव के द्वारा ही आधुनिक लोकतंत्रों के लोग विधायिका के विभिन्न पदों पर आसीन होने के लिये व्यक्तियों को चुनते हैं। चुनाव के द्वारा ही क्षेत्रीय एवं स्थानीय निकायों के लिये भी व्यक्तियों का चुनाव होता है। वस्तुतः आज चुनाव का प्रयोग व्यापक स्तर पर होने लगा है और यह निजी संस्थानों, क्लबों, विश्वविद्यालयों, धार्मिक संस्थानों आदि में भी प्रयुक्त होता है। देश में अवधि के आधार पर मुख्यत:  दो तरह के चुनाव होते है- आम चुनाव और उप-चुनाव। इन दोनों में प्रमुख अंतर अवधि का है। आम चुनाव जहाँ कार्यकाल (सामान्यत: 5 साल) समाप्त होने पर होते है, वहीं उप-चुनाव किसी विशेष कारण से कोई सीट रिक्त होने पर होते हैं। आइये इन्हें विस्तार से समझते हैं।

आम चुनाव (General Election):

आमतौर पर नियमित समयांतराल पर होने वाला चुनाव जिसमें किसी देश या राज्य के सभी या अधिकांश निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार चुने जाते हैं, आम चुनाव कहलाते हैं। दूसरे शब्दों में आम चुनाव को पूरे देश या राज्य में लोकसभा या विधान सभा की सीटों के लिए होने वाले चुनावों के रूप में वर्णित किया जाता है। ये चुनाव सभी निर्वाचन क्षेत्रों में एक ही समय यानि एक ही दिन या कुछ दिनों के भीतर आयोजित किये जाते हैं। आम चुनावों के साथ, देश के नागरिकों को लोकसभा या राज्य विधानसभा में पूरे पाँच साल के कार्यकाल के लिए प्रतिनिधित्व करने के लिए अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट देकर सरकार के गठन में भाग लेने का अवसर मिलता है।

आम चुनाव आम तौर पर नियमित समयांतराल (पाँच साल) पर होते हैं और गुप्त मतदान द्वारा आयोजित किए जाते हैं। आम चुनाव को एक लोकतांत्रिक देश में सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना माना जाता है क्योंकि यह लोगों की इच्छा को दर्शाता है कि वे अपने देश पर कैसे शासन करना चाहते हैं और नागरिकों को अपने प्रतिनिधियों को चुनने का अवसर देता है।

नोट:  भारत का पहला आम चुनाव 25 अक्टूबर 1951 को शुरू हुआ और 21 फरवरी 1952 तक जारी रहा। जिसमें जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधान मंत्री बने।

उप-चुनाव ( By-election)

उप-चुनाव से तात्पर्य  किसी सदस्य की मृत्यु या इस्तीफे के कारण खाली हुई सीट के लिए एक निर्वाचन क्षेत्र में होने वाले चुनाव से है। उपचुनाव, जिसे विशेष चुनाव के रूप में भी जाना जाता है, भारत के विधायी निकायों में रिक्त सीटों को भरने के लिये आयोजित चुनावों को संदर्भित करता है। उपचुनाव तब आयोजित किये जाते हैं, जब विधायिका में कोई सीट निलंबन, इस्तीफे, अयोग्यता या मौजूदा सदस्य के निष्कासन जैसे कारणों से खाली हो जाती है। अर्थात आम चुनावों के बीच रिक्त पद को भरने के लिए उपचुनाव होते हैं। इन्हें भारत में उप-चुनाव और संयुक्त राज्य अमेरिका में विशेष चुनाव कहा जाता है।

इन चुनावों में एक नए प्रतिनिधि को उस कार्यकाल के लिए चुना जाता है जो पूर्व पदाधिकारी की मृत्यु या इस्तीफे के बाद बना रहता है। भारत में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम एक उम्मीदवार को दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की अनुमति देता है। यदि कोई उम्मीदवार दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ता है, और दोनों से जीत जाता है, तो उसे एक सीट छोड़नी पड़ती है, जिससे उसके द्वारा छोड़ी गई सीट पर उप-चुनाव होता है। ये तब भी आयोजित किए जाते हैं, जब किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र में चुना गया उम्मीदवार पार्टी बदल लेता है।

जन प्रतिनिधित्त्व अधिनियम, 1951 की धारा 151A निर्वाचनआयोग को संसद और राज्य विधानमंडलों के सदनों में आकस्मिक रिक्तियों की तिथि से छह महीने के भीतर उपचुनावों के माध्यम से भरने के लिए अधिदेशित करती है, बशर्ते कि कार्यकाल की शेष अवधि एक वर्ष या उससे अधिक हो। अर्थात यदि संसद और राज्य विधानमंडल की शेष अवधि सीट खाली होने की तारीख से एक वर्ष से कम है तो उपचुनाव कराने की कोई आवश्यकता नहीं है।

आम चुनाव और उप चुनाव के बीच अंतर

आम चुनाव और उप-चुनाव के बीच मुख्य अंतर यह है कि आम चुनाव एक ही समय में किसी देश या राज्य के सभी निर्वाचन क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को चुनने के लिए आयोजित किए जाते हैं, जबकि उप-चुनाव किसी विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्र में रिक्त सीट को भरने के लिए आयोजित किए जाते हैं। आम चुनाव आम तौर पर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम पर होते हैं, जबकि उप-चुनाव किसी भी समय हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त इनमें और भी अंतर हैं. जो निम्नलिखित हैं:-

  • उद्देश्य: आम चुनाव सरकार चुनने के उद्देश्य से आयोजित किये जाते हैं। इसके विपरीत, उप-चुनाव किसी सदस्य के निधन या इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट को भरने के उद्देश्य से कराए जाते हैं।
  • समय : आम चुनाव निर्धारित समय अंतराल पर होते हैं, जैसे कि हर चार या पाँच साल में। दूसरी ओर, उप-चुनाव, आम चुनावों के बीच रिक्त होने वाली सीट को भरने के लिए आयोजित किए जाते हैं.
  • कार्यकाल  आम चुनाव में निर्वाचित उम्मीदवार पूरे पाँच साल के कार्यकाल के लिए पद पर रह सकता है। इसके विपरीत, उप-चुनाव जीतने वाला उम्मीदवार केवल शेष कार्यकाल के लिए ही पद पर बना रह सकता है।
  • क्षेत्र: आम चुनाव विधायी निकाय की सभी सीटों को कवर करते हैं, जबकि उपचुनाव केवल खाली सीट या सीटों के लिए होते हैं। अत: आम चुनाव का क्षेत्र बड़ा होता है और उप-चुनाव का क्षेत्र बहुत कम होता है
  • मतदाता पात्रता : आम चुनावों में सभी पात्र नागरिकों को मतदान करने की अनुमति होती है, जबकि उप-चुनावों में, केवल उस विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता जहाँ सीट रिक्त हुई है,  को मतदान करने की अनुमति होती है।
  • मतदाता संख्या : आम चुनावों में मतदातों की संख्या आमतौर पर उप-चुनावों की तुलना में अधिक होती है क्योंकि आम चुनाव निर्धारित समय अंतराल पर होते हैं और अधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
  • प्रचार : उप-चुनावों की तुलना में आम चुनाव में बहुत अधिक प्रचार अभियान किये जाते हैं. साथ ही मीडिया कवरेज और अभियान खर्च भी अधिक होता है।
  • महत्त्व : आम चुनाव अधिक महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि वे देश या राज्य की सरकार का निर्धारण करते हैं, जबकि उपचुनाव केवल निर्वाचित सदस्य की मृत्यु या अयोग्यता के कारण विधायी निकाय में रिक्त स्थान को भरते हैं।
क्रमआम चुनावउप-चुनाव
1आम चुनाव सरकार चुनने के उद्देश्य से आयोजित किये जाते हैं।उप-चुनाव किसी सदस्य के निधन या इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट को भरने के उद्देश्य से कराए जाते हैं।
2आम चुनाव निर्धारित समय अंतराल पर होते हैं, जैसे कि हर चार या पाँच साल में.उप-चुनाव, आम चुनावों के बीच रिक्त होने वाली सीट को भरने के लिए आयोजित किए जाते हैं.
3आम चुनाव में निर्वाचित उम्मीदवार पूरे पाँच साल के कार्यकाल के लिए पद पर रह सकता है।उप-चुनाव जीतने वाला उम्मीदवार केवल शेष कार्यकाल के लिए ही पद पर बना रह सकता है।
4आम चुनाव विधायी निकाय की सभी सीटों को कवर करते हैं अत: आम चुनाव का क्षेत्र बड़ा होता है.उपचुनाव केवल खाली सीट या सीटों के लिए होते हैं। उप-चुनाव का क्षेत्र बहुत कम होता है.
5आम चुनावों में सभी पात्र नागरिकों को मतदान करने की अनुमति होती है,उप-चुनावों में, केवल उस विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता जहाँ सीट रिक्त हुई है,  को मतदान करने की अनुमति होती है।
6आम चुनाव में बहुत अधिक प्रचार अभियान किये जाते हैं. साथ ही मीडिया कवरेज और अभियान खर्च भी अधिक होता है।उप-चुनावों में पचार अभियान और  मीडिया कवरेज अपेक्षाकृत कम होता है.

संक्षेप में कहें तो आम चुनाव वे चुनाव होते हैं जो सरकार गठन के लिए हर पाँच  साल के बाद आयोजित कराएँ जातें हैं। इसके विपरीत, भारत में उप-चुनाव अक्सर किसी निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित सदस्य की मृत्यु या इस्तीफे के अलावा विभिन्न कारणों से आयोजित किए जाते हैं।

उम्मीद है अब आपको आम चुनाव और उप-चुनाव के बीच अंतर स्पष्ट हो गया होगा। आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी कैसी लगी? हमें कॉमेंट करके अवश्य बताएँ और अपने दोस्तों को भी शेयर करें। यदि आपके मन में कोई प्रश्न अथवा शंका है तो आप हमसे पूछ सकते हैं। हम आपके प्रश्नों अथवा शंका का समाधान करने का पूरा प्रयास करेंगे। “धन्यवाद”

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