आरंभ और प्रारंभ में अंतर

आरंभ और प्रारंभ में अंतर

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नमस्कार… अंतरकोश में आपका स्वागत है। आज हम इस पोस्ट में आरंभ और प्रारंभ के बीच अंतर बताने जा रहे हैं। दोनों ही शब्द संस्कृत भाषा के शब्द हैं। आरंभ और प्रारंभ का अर्थ देखने में एक जैसा लगता है। दोनों शब्दों का अर्थ किसी कार्य को शुरू करना है। इनकी संरचना में कोई विशेष अंतर नहीं है। अंतर है तो सिर्फ यह है कि प्रारंभ में आरंभ से पहले ‘प्र’ उपसर्ग जुड़ गया है। इसी उपसर्ग के कारण दोनों शब्दों के भावार्थ में अंतर आता है। तो आइए देखते हैं कि उपसर्ग के जुड़ने से दोनों शब्दों में क्या अंतर है? अच्छे से समझने के लिए पोस्ट को अंत तक पढ़ें।

आरंभ:-  किसी कार्य को शुरू करने के लिए आरंभ शब्द का प्रयोग किया जा सकता है। फिर चाहे वह कोई भी कार्य क्यों न हो। जैसे – 

● दिन का आरंभ सूर्योदय होने से होता है।

● मैंने पढ़ना आरंभ कर दिया।

● पूजा आरंभ होने वाली है।

● विवाह समारोह कुछ ही देर में आरंभ होगा। 

प्रारंभ:-  प्रारंभ में ‘प्र’ उपसर्ग लगा हुआ है।जिसका अर्थ होता है आधिक्य, पूर्णता या विशिष्टता। अतः प्रारंभ का अर्थ भी किसी कार्य को शुरू करने के लिए किया जाता है लेकिन चूँकि इसमें विशिष्टता बोधक प्र उपसर्ग लगा हुआ है। इसलिए उस कार्य की शुरुआत भी कुछ विशिष्टता और औपचारिकता जुड़ जाती है। इसलिए प्रारंभ शब्द का प्रयोग साधरण कार्यों के लिए न करके विशेष या महत्त्वपूर्ण कार्यों को शुरू करने लिए किया जाता है। जैसे- 

● दिल्ली में परियोजना का प्रारंभ किया गया।

● यज्ञ प्रारंभ होने वाला है।

● मैंने उपन्यास लिखना प्रारम्भ कर दिया है।

आरंभ और प्रारंभ में अंतर :-

● जहाँ आरंभ शब्द सामान्य कोटि के कार्यों के लिए किया जाता है, वहीं प्रारंभ शब्द का प्रयोग किसी विशेष कार्य के लिए किया जाता है। 

● आरंभ के लिए अंग्रेजी में begin या start शब्द का प्रयोग करते हैं, वहीं प्रारंभ के लिए अंग्रेजी में commencement शब्द का प्रयोग करते हैं।

● आरंभ शब्द का प्रयोग केवल क्रिया के रूप में किया जाता है। जबकि प्रारंभ शब्द का प्रयोग क्रिया और संज्ञा दोनों रूप में किया जाता है।

● परीक्षा की दृष्टि से देखें तो आरंभ का विलोम शब्द अंत होता है, वहीं प्रारंभ का विलोम शब्द समाप्ति होता है।

● रुके हुए कार्य को आप फिर से शुरू करने के लिए पुनःआरंभ शब्द का प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन पुनःप्रारंभ शब्द का प्रयोग नहीं कर सकते। 

सारांश :- कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि विशिष्ट आरंभ ही प्रारंभ है। अतः दोनों में सूक्ष्म अंतर है। यदि आप आरंभ के स्थान पर प्रारंभ शब्द का प्रयोग करते हैं तो इसमें कोई दोष नहीं है। इन दोनों शब्दों का प्रयोग परस्पर और पर्यायवाची के रूप में किया जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्तनी की दृष्टि से आरंभ और आरम्भ दोनों ही शब्द सही हैं। किंतु मानक हिंदी में आरंभ शब्द का प्रयोग किया जाता है।

नोट :- ध्यान दें, इंटरनेट पर कई वेबसाइट पर आरंभ और प्रारंभ के बीच गलत अंतर बताया गया है। उन्होंने पुनः आरंभ करने के लिए प्रारंभ शब्द का प्रयोग किया है और इसके लिए अंग्रेजी में restart शब्द का यूज़ किया है। जो कि गलत है। इसलिए भ्रामक जानकारी से बचें। सही जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट “www.antarkosh.com” देखें। 

उम्मीद है कि अब आपको आरंभ और प्रारंभ के बीच अंतर स्पष्ट हो गया होगा। आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी कैसी लगी? हमें कॉमेंट करके अवश्य बताएँ और दोस्तों को भी शेयर करें। धन्यवाद

6 thoughts on “आरंभ और प्रारंभ में अंतर

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