चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि में अंतर

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नमस्कार… अंतरकोश में आपका स्वागत है। आज हम इस पोस्ट में  जानेंगे कि चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के बीच क्या अंतर है? और एक साल में दो नवरात्रि क्यों मनायी जाती हैं? वैसे जानकारी के लिए आपको बता दें कि नवरात्रि साल में दो बार नहीं बल्कि चार बार आती हैं और चारों नवरात्रों के पीछे अलग-अलग कारण और प्रयोजन हैं। लेकिन आखिर ऐसा क्या है, जो इन्हें एक दूसरे से अलग बनाता है? आइए जानते हैं कि इनके बीच क्या अंतर है। अच्छे से समझने के लिए पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें।

एक वर्ष में चार नवरात्रि 

जैसा कि हम बता चुके हैं कि नवरात्रि साल में दो बार नहीं बल्कि चार बार आती हैं और चारों नवरात्रों के पीछे अलग-अलग कारण और प्रयोजन हैं। पहली नवरात्रि चैत्र माह में आती है। इस नवरात्रि को वसंत नवरात्रि भी कहते हैं। दूसरी नवरात्रि अषाढ़ माह में आती है, जिसे गुप्त नवरात्रि कहते हैं। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण नवरात्रि अश्विन माह में आती है, जिसे शारदीय नवरात्रि भी कहते हैं। चौथी नवरात्रि माघ माह में आती है, जिसे गुप्त नवरात्रि भी जाता है। हालांकि सभी नवरात्रें शक्ति की देवी माँ दुर्गा को ही समर्पित हैं। लेकिन पूजा, उपासना पद्धति में सभी अलग अलग हैं।

चैत्र और अश्विन महीने में आने वाली नवरात्रि प्रकट नवरात्रि कहलाती हैं। जबकि आषाढ़ और माघ के महीने में आने वाली नवरात्रि गुप्त नवरात्रि कहलाती हैं। गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से तांत्रिक मनाते हैं, और ये इस समय विशेष रूप से आदिशक्ति की आराधना कर तंत्र सिद्धियाँ प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। जबकि गृहस्थ और पारिवारिक लोगों के लिए ​सिर्फ चैत्र और शारदीय नवरात्रि को ही उत्तम माना गया है। गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की पूजा होती है। ये दस महाविद्याएँ हैं – माँ काली, माँ तारादेवी, माँ त्रिपुर सुंदरी, माँ भुवनेश्वरी, माँ छिन्नमस्ता, माँ त्रिपुर भैरवी, माँ ध्रूमावती, माँ बगलामुखी, माँ मातंगी और माँ कमला देवी। वहीं शारदीय और वसंत नवरात्रि की बात करें तो इनमें माता के नौ रूपों की पूजा होती है। ये नौ रूप हैं – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंधमाता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।

चैत्र नवरात्रि:- 

वर्ष की पहली नवरात्रि चैत्र माह में आती है, जिसे चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) कहा जाता है। इस नवरात्रि के साथ हिंदू नव वर्ष की भी शुरुआत होती है। माना जाता है कि जब पृथ्वी पर म​हिषासुर का आतंक हद से ज्यादा बढ़ गया था और देवता भी उसे हरा पाने में असमर्थ थे, क्योंकि उसे वरदान प्राप्त था कि कोई भी देवता या दानव उस पर विजय प्राप्त नहीं कर सकता। ऐसे में देवताओं ने माता पार्वती को प्रसन्न कर उनसे रक्षा करने का अनुरोध किया। इसके बाद माता रानी ने अपने अंश से नौ रूप प्रकट किए, जिन्हें देवताओं ने अपने शस्त्र देकर शक्ति संपन्न किया। ये क्रम चैत्र के महीने में प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर 9 दिनों तक चला, तब से इन नौ दिनों को चैत्र नवरात्रि के रूप में मनाया जाने लगा। इस दिन कई जगहों पर गुड़ी पड़वा का त्योहार भी मनाया जाता है। 

शारदीय नवरात्रि:- 

ये नवरात्रि आश्विन माह में आती ​है, जिसे शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। देवी दुर्गा ने आश्विन के महीने में महिषासुर पर आक्रमण कर उससे नौ दिनों तक युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध किया। इसलिए इन नौ दिनों को शक्ति की आराधना के लिए समर्पित कर दिया गया। चूंकि आश्विन मास में शरद ऋतु का प्रारंभ हो जाता है, इसलिए इसे शारदीय नवरात्रि  भी कहा जाता है। शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन को विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है। 

चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि में अंतर:- 

◆ चैत्र नवरात्रि के दौरान कठिन साधना और कठिन व्रत पर जोर दिया गया है, जबकि शारदीय नवरात्रि के दौरान सात्विक साधना, नृत्य, उत्सव आदि का आयोजन किया जाता है। ये दिन शक्ति स्वरूप माता की आराधना के दिन माने गए हैं। 

◆ चैत्र नवरात्रि का महत्व महाराष्ट्र, आन्ध्रप्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में अधिक है, जबकि शारदीय नवरात्रि का महत्त्व गुजरात और पश्चिम बंगाल में ज्यादा है। शारदीय नवरात्रि के दौरान बंगाल में शक्ति की आराधना स्वरूप दुर्गा पूजा पर्व मनाया जाता है। वहीं गुजरात में गरबा आदि का आयोजन किया जाता है।

◆ चैत्र नवरात्रि के अंत में राम नवमी आती है। मान्यता है कि प्रभु श्रीराम का जन्म राम नवमी के दिन ही हुआ था। जबकि शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन महानवमी के रूप में मनाया जाता है। इसके अगले दिन विजय दशमी पर्व होता है। विजय दशमी के दिन माता दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था और प्रभु श्रीराम ने रावण का वध किया था। इसलिए शारदीय नवरात्रि विशुद्ध रूप से शक्ति की आराधना के दिन माने गए हैं।

◆ मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि की साधना आपको मानसिक रूप से मजबूत बनाती है और आध्यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति करने वाली है। वहीं शारदीय नवरात्रि सांसारिक इच्छाओं को पूरा करने वाली मानी जाती है।

◆ शारदीय नवरात्रि को सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति हेतु मनाया जाता है जबकि चैत्र नवरात्रि को आध्‍यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति, सिद्धि, मोक्ष हेतु मनाया जाता है।

◆ चैत्र नवरात्रि में वसंत का आगमन होता, जबकि शारदीय नवरात्र में जाड़े का आरंभ होता।

उम्मीद है कि अब आपको चारों नवरात्रि के बीच अंतर स्पष्ट हो गया होगा। आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी कैसी लगी? हमें कॉमेंट करके अवश्य बताएँ और अपने दोस्तों को भी शेयर करें। यदि आपके मन में कोई प्रश्न अथवा शंका है तो आप हमसे पूछ सकते हैं। हम आपके प्रश्नों अथवा शंका का समाधान करने का पूरा प्रयास करेंगे। “धन्यवाद”

इस  प्रकार के और अंतर जानने के लिए “www.antarkosh.com पर visit करें।

नोट:- ऊपर दी गई जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहाँ प्रस्तुत किया गया है.

Sources –  https://www.google.com/amp/s/www.tv9hindi.com/spiritual/know-why-chaitra-navratri-is-celebrated-what-is-the-difference-between-shardiya-navratri-and-chaitra-navratri-1142577.html/amp#cobssid=s

https://hindi.boldsky.com/amphtml/inspiration/know-the-difference-between-chaitra-navratri-and-shardiya-navratri-028455.html

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