जल और पानी में अंतर

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नमस्कार… अंतरकोश में आपका स्वागत है। आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से आपको जल और पानी में अंतर बताने जा रहें हैं। हम सब प्रतिदिन पानी का उपयोग करते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा कि जल और पानी में क्या अंतर होता है? अधिकांश लोग इन्हें एक ही समझते हैं लेकिन इनमें कुछ अन्तर होता है। आज हम इस आर्टिकल में इसी अन्तर को बता रहे हैं। अच्छे से समझने के लिये आर्टिकल को अंत तक जरूर  पढ़ें.

जल में पवित्रता का भाव (sense) होता है। जबकि पानी में नहीं। पानी शब्द में सभी प्रकार का पानी शामिल है। पानी दूषित भी हो सकता है। लेकिन जल हमेशा पवित्र होता है। हमारे ऋषि-मुनि जल शब्द का ही प्रयोग करते थे और आज भी सभी धार्मिक कार्यों में जल शब्द का ही प्रयोग होता है। पण्डित जी ये नहीं कहते कि एक लौटा पानी ले आओ बल्कि वो एक लौटा जल माँगते हैं। इसी तरह नदियों के पानी को जल कहते हैं। जैसे गंगा जल।

जहाँ जल शब्द का प्रयोग होता है वहाँ पानी शब्द का प्रयोग करना अनुचित है और जहाँ पानी शब्द का प्रयोग होता है वहाँ जल शब्द का प्रयोग करना अनुचित लगता है जैसे कपड़े पानी से धुलते हैं न कि जल से। आप “चुल्लू भर पानी में डूब मरना की जगह यह नहीं कह सकते कि चुल्लू भर जल में डूब मरना। इसी तरह आप जल-पान की जगह पानीपान नहीं कह सकते। 

इस तरह जल और पानीआपने देखा कि पानी और जल में क्या अन्तर है। हालांकि दोनों शब्द एक दूसरे के पर्यायवाची हैं और दोनों ही इंग्लिश में वाटर हैं। किन्तु जल का भाव अलग है और पानी का अलग। दोंनो का प्रयोग भी अलग अलग है।

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इस  प्रकार के और अंतर जानने के लिए “www.antarkosh.com पर visit करें।

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