मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर

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नमस्कार… अंतरकोश में आपका स्वागत है। आज इस पोस्ट में हम मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर के बारे में जानने वाले हैं। मुहावरे और लोकोक्ति हिंदी विषय से जुड़े हुए दो महत्त्वपूर्ण शब्द हैं। हिंदी विषय के विद्यार्थियों के लिए मुहावरे और लोकोक्ति के अर्थ और अंतर को जानना बहुत जरूरी है। क्योंकि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं इनसे सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर को अच्छे से जानने के लिए इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें।

किसी भी भाषा का अपना एक सौंदर्य होता है। इसी तरह हिंदी भाषा का अपना एक सौंदर्य है। किंतु यह सौंदर्य बिना मुहावरे और लोकोक्तियों के अधूरा है। इसलिए हिंदी भाषा को आकर्षक और प्रभावशाली बनाने के लिए मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग किया जाता है। ये ऐसे वाक्य या वाक्यांश होते हैं जो न केवल उस कथन को प्रभावशाली बनाते हैं बल्कि उस कथन को आकर्षक भी बना देते हैं। इनसे भाषा रुचिकर और गतिशील हो जाती है। ये वाक्य या वाक्यांश ही मुहावरे और लोकोक्तियाँ कहलाते हैं। हर भाषा का अपना मुहावरों और लोकोक्तियों का भंडार होता है। इंग्लिश भाषा में इन्हें क्रमशः idioms और proverb कहते हैं। 

मुहावरे:-

वाक्य में विशेष अर्थ प्रकट करने वाले शब्द-समूह या शब्दांश को मुहावरा कहते हैं। मुहावरा अरबी भाषा का शब्द है। जिसका अर्थ  ‘अभ्यास होनायाआदि होना होता है। अर्थात ऐसा वाक्यांश जो अपने साधारण अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ को व्यक्त करे मुहावरा कहलाता है। कुछ विद्वानों द्वारा इसे वाग्धारा भी कहा जाता है। अंग्रेजी भाषा में इसके लिए इडियम (idiom) शब्द का प्रयोग किया जाता है।

मुहावरें वास्तव में एक पूर्ण वाक्य न होकर वाक्यांश होते हैं। ये वाक्य को सुन्दर, कलात्मक, गतिशील और रोचक बनाते हैं। मुहावरे किसी व्यक्ति के अनुभव पर आधारित होते हैं। और ये ज्यों के त्यों वाक्य में प्रयोग किए जाते हैं। इनका रूप परिवर्तन नहीं किया जा सकता अर्थात पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग नहीं कर सकते अन्यथा भाषा की प्रभावशीलता और भाव दोनों समाप्त  हो जाएंगे। जैसे:- पानी पानी होना के स्थान पर जल जल होना प्रयोग नहीं कर सकते।

मुहावरों की विशेषताएं:-

मुहावरे में लिंग, वचन और काल आदि के अनुसार कुछ परिवर्तन आ जाता है।

मुहावरा हमेशा वाक्य का अंग बनकर प्रयुक्त होता है, स्वतंत्र रूप में नहीं।

मुहावरे पूर्ण वाक्य नहीं होते हैं। अतः इन्हें स्वतंत्र रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता है।

मुहावरे में प्रयुक्त शब्दों के स्थान पर उनके पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग नहीं होता है। जैसे-‘आँखें खुलना’ की जगह  ‘नेत्र खुलना’ नहीं लिखा जा सकता। इसी तरह ‘ कलम तोड़ना की जगह पैन तोड़ना नहीं कहा जा सकता।

मुहावरों का प्रयोग प्रसंग के अनुकूल किया जाता है। जैसे:- ‘दूध के दांत न टूटना का अर्थ अनुभवहीन होना, इसे किसी और अर्थ में प्रयोग नहीं किया जा सकता। इसी तरह ‘बाग बाग होनाका अर्थ खुश होने के रूप में प्रयोग किया जाएगा और किसी अन्य अर्थ में नहीं।

देश और समाज की तरह मुहावरे भी बनते बिगड़ते रहते हैं। नये समाज के साथ नए मुहावरे आते हैं।

मुहावरों के अंत में क्रियापद अवश्य आता है; जैसे- नौ दो ग्यारह होना, अंधा होना, गाल बजाना, हथेली पर सरसों उगाना आदि।

मुहावरे अपूर्ण वाक्य या वाक्यांश होते हैं, अतः प्रयोग करते समय इनमें कभी-कभी कुछ बदलाव आ जाता है।

भाषा को रोचक और प्रभावमयी बनाने के लिए मुहावरों का प्रयोग किया जाता है।

मुहावरों के प्रयोग से हास्य, क्रोध, घृणा, प्रेम आदि भावों को आसानी से व्यक्त किया जा सकता है।

मुहावरों के प्रयोग से वक्ता कम से कम शब्दों में अपने भावों को अधिक सरलता से स्पष्ट कर सकता है।

मुहावरों के प्रयोग से भाषा अधिक आकर्षक, प्रभावपूर्ण और रोचक बन जाती है। 

कुछ प्रसिद्ध मुहावरों के उदाहरण:-

अंधे की लकड़ी – (एकमात्र सहारा) – मानव अपने माता-पिता के लिए अंधे की लकड़ी है।

अक्ल पर पत्थर पड़ना (बुद्धि नष्ट होना) – मुसीबत आने पर मनुष्य की अक्ल पर पत्थर पड़ जाते हैं।

ऊँगली पर नचाना – (अपने वश में कर लेना) – वह कमा कर देता है , इसलिए वह सारे घर को ऊँगली पर नचाता है।

अपना उल्लू सीधा करना (अपना स्वार्थ पूरा करना) – अरुण को तो अपना उल्लू सीधा करना था, अब वह राहुल से बात भी नहीं करता।

कान भरना – (चुगली करना) – पापा के कान भरकर राजू ने पप्पू को पिटवा दिया।

कलेजे का टुकड़ा – (बहुत प्रिय) – लोकेश अपनी माता जी के कलेजे का टुकड़ा है।

आँखें खुलना – (होश आना) – एक बार ठोकर लगने के बाद व्यक्ति की आँखें खुल जाती हैं।

गूलर का फूल (दुर्लभ व्यक्ति) – तुम उससे क्या लड़ोगे वह तो बेचारा गूलर का फूल है।

दिमाग खाना (बकवास करना) – महिमा मेरा दिमाग मत खाओ मुझे बहुत काम है।

धरती पर पाँव न रखना (अभिमानी होना) – उसका पुत्र विदेश से आया है। वह तो धरती पर पाँव ही नहीं रख रहा है।

नाक कट जाना (इज्जत जाना) – तुम्हारे चोरी करते पकड़े जाने की वजह से हमारे खानदान की तो नाक ही कट गई।

लोकोक्ति:- 

लोकोक्ति शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है लोक+उक्ति। अर्थात जन सामान्य द्वारा किसी क्षेत्र विशेष में कही हुई बात को लोकोक्ति कहते हैं। वास्तव में लोकोक्तियाँ किसी विशेष स्थान पर प्रसिद्ध हो जाने वाले कथन होते हैं। इनका प्रयोग वक्ता द्वारा अपने वाक्य या अपनी बात पर विशेष जोर देने के लिए जाता है। लोकोक्तियों के अंतर्गत किसी कवि की प्रसिद्ध उक्ति भी आ जाती है। लोकोक्तियाँ वाक्यांश न होकर पूर्ण और स्वतंत्र वाक्य होती हैं। और यह किसी प्रासंगिक घटना पर आधारित होती हैं। लोकोक्तियाँ गागर में सागर भरने की क्षमता रखती हैं। ये कथन के भाव को और भी अधिक स्पष्ट कर देती हैं। लोकोक्ति को कहावत या सूक्ति भी कहा जाता है। ड़ॉ वसुदेव शरण अग्रवाल कहते हैं कि “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते हुए सूत्र हैं।” लोकोक्ति में किसी स्थान विशेष की संस्कृति और भाषाओं के मिश्रण के दर्शन होते हैं। 

लोकोक्ति की विशेषताएँ:-

  • समाज का सही मार्गदर्शन।
  • धार्मिक एवं नैतिक उपदेश।
  • हास्य और मनोरंजन में प्रयोग।
  • सर्वव्यापी एवं सर्वग्राही अर्थात लोकोक्तियों के अर्थ प्रत्येक समाज में एक से रहते हैं।
  • प्राचीन परंपरा से चलती आ रही है।
  • जीवन के हर पहलू को स्पर्श करती हैं।
  • अनुभव पर आधारित एवं जीवनोपयोगी बातों के बारे में सुझाव देती हैं।
  • गहरी से गहरी बात को सूक्ष्म शब्दों में कहने की क्षमता।
  • लोकोक्तियाँ किसी कटु बात को भी मनोरंजक अंदाज में बयाँ करती हैं।

कुछ प्रसिद्ध लोकोक्तियों के उदाहरण:-

अन्धों में काना राजा = मूर्खो में कुछ पढ़ा-लिखा व्यक्ति।

अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता = अकेला व्यक्ति बिना दूसरों के सहयोग के कोई बड़ा काम नहीं कर सकता।

अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत = समय निकल जाने के बाद पछताना व्यर्थ होता है।

अपनी पगड़ी अपने हाथ = अपनी इज्जत अपने हाथ होती है।

आम के आम गुठलियों के दाम = अधिक लाभ या दोहरा लाभ 

आये थे हरि-भजन को, ओटन लगे कपास = आवश्यक कार्य को छोड़कर अनावश्यक कार्य में लग जाना।

उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे = अपना अपराध स्वीकार न करके पूछने वाले को दोष देना

ऊँची दुकान फीके पकवान = जिसका नाम अधिक हो, पर गुण कम हो।

ऊँट के मुँह में जीरा = जरूरत के अनुसार चीज न होना।

एक पंथ दो काज = एक काम से दूसरा काम हो जाना

एक अनार सौ बीमार = जिस चीज के बहुत चाहने वाले हों।

एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकती = एक वस्तु के दो समान अधिकारी नहीं हो सकते।

कंगाली में आटा गीला = परेशानी पर परेशानी आना

कौआ चले हंस की चाल = गुणहीन व्यक्ति का गुणवान व्यक्ति की भांति व्यवहार करना।

काम का न काज का, दुश्मन अनाज का = किसी मतलब का न होना।

खोदा पहाड़ निकली चुहिया = बहुत कठिन परिश्रम का थोड़ा लाभ

घर की मुर्गी दाल बराबर = घर की वस्तु या व्यक्ति को कोई महत्त्व न देना।

जैसी करनी वैसी भरनी = कर्म के अनुसार फल मिलता है।

जिसकी लाठी उसकी भैंस = बलवान की ही जीत होती है।

दीवारों के भी कान होते हैं = गुप्त परामर्श एकांत में धीरे बोलकर करना चाहिए।

न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी = असंभव शर्ते रखना।

पाँचों उँगलियाँ बराबर नहीं होती = सब मनुष्य एक जैसे नहीं होते।

बहती गंगा में हाथ धोना = अवसर का लाभ उठाना।

मुहावरे और लोकोक्ति  में अंतर:- 

1- मुहावरा वाक्य का अंश होता है जबकि लोकोक्ति पूर्ण वाक्य होती है।

 2- मुहावरा अपने रूढ़ अर्थ के लिए प्रसिद्ध होता है जबकि लोकोक्ति लोक में प्रचलित उक्ति होती है जो भूतकाल का लोक अनुभव होती है 

 3-मुहावरों में वाक्य के अनुसार परिवर्तन होता है जबकि पूर्ण वाक्य होने के कारण लोकोक्ति का प्रयोग स्वतंत्र और अपने आप में पूर्ण इकाई के रूप में होता है।

4- मुहावरे का प्रयोग वाक्य के अंत, आरंभ और बीच में कहीं भी किया जा सकता हैं जबकि लोकोक्ति एक संपूर्ण वाक्य हैं।

5- मुहावरे शब्द शक्ति पर आधारित होने के कारण दूसरी भाषा में रूपांतरित नहीं हो सकते क्योंकि इससे उनके शब्दों का अर्थ नष्ट हो सकता। किंतु लोकोक्तियों का रूपांतरण दूसरी भाषा में हो सकता है।

6- मुहावरों के अंत में प्रायः “ना ” प्रत्यय लगा होता है। किंतु लोकोक्तियों के अंत में कोई विशेष प्रत्यय नहीं होता।

7- मुहावरे केवल गद्य रूप में प्रयुक्त होते हैं। किन्तु लोकोक्तियाँ गद्य और पद्य दोनों रूप में प्रयोग हो सकती हैं।

8- मुहावरों में व्यंग्य या अतिशयोक्ति नहीं होती जबकि लोकोक्तियां अक्सर व्यंग्य और अतिशयोक्ति से परिपूर्ण होती हैं। 

9- मुहावरों में लक्षणा शक्ति होती है जबकि लोकोक्तियों में व्यंजना शक्ति होती है।

10- मुहावरे अपेक्षाकृत छोटे होते हैं जबकि लोकोक्तियां बड़ी होती हैं।

इस प्रकार आपने पढ़ा कि मुहावरे और लोकोक्तियां 

दोनों एक दूसरे से अलग हैं लेकिन ये दोनों ही हिंदी भाषा का शृंगार हैं। भाषा की समृद्धि और उसकी अभिव्यक्ति क्षमता के विकास के लिए मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है। भाषा में इनके प्रयोग से सजीवता और प्रवाहमयता आती है, फलस्वरूप पाठक या श्रोता शीघ्र ही प्रभावित हो जाता है। जिस भाषा में इनका जितना अधिक प्रयोग होगा, उसकी अभिव्यक्ति क्षमता उतनी ही प्रभावपूर्ण व रोचक होगी।

उम्मीद है आपको मुहावरों और लोकोक्तियों में अब अंतर स्पष्ट हो गया होगा। आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी कैसी लगी? हमें कॉमेंट करके अवश्य बताएँ और अपने दोस्तों को भी शेयर करें। यदि आपके मन में कोई प्रश्न अथवा शंका है तो आप हमसे पूछ सकते हैं। हम आपके प्रश्नों अथवा शंका का समाधान करने का पूरा प्रयास करेंगे। “धन्यवाद”

इस  प्रकार के और अंतर जानने के लिए “www.antarkosh.com पर visit करें।

3 thoughts on “मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर

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