लॉयर, एडवोकेट, बैरिस्टर, प्लीडर, एडवोकेट जनरल और अटॉर्नी जनरल में अंतर

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Hello everyone… अंतरकोश में आपका स्वागत है। आज हम इस आर्टिकल में आपको वकील से जुड़े शब्द जैसे लॉयर, एडवोकेट, बैरिस्टर, प्लीडर, एडवोकेट जनरल और अटॉर्नी जनरल आदि शब्दों में अंतर बताने जा रहे हैं। अक्सर आपको इनके बारे में सुनने को कहीं न कहीं मिल ही जाता होगा। परन्तु क्या आप कभी सोचा है कि इन सब में क्या अंतर है? क्या लॉयर और एडवोकेट एक ही व्यक्ति होते हैं ? क्या आप लोगों के मन में इन शब्दों को लेकर कंफ्यूजन रहती है ? तो फिर इस लेख को अवश्य पढ़ें। आपके सारे कंफ्यूजन दूर हो जायेंगे। एक बात और  गूगल पर या यूट्यूब पर बहुत जगह इनके बीच के अंतर को सही ढंग से नहीं किया गया है। आप पढ़कर भी कुछ नहीं समझ पाएँगे लेकिन अंतरकोश पर इनके बीच जो अंतर बताया जा रहा है वह स्पष्ट और बिल्कुल सही है। 

लॉयर (Lawyer):- 

लॉयर, वह व्यक्ति होता है जिसके पास लॉ (law) की डिग्री होती है अर्थात विधि स्नातक, अथवा कानून का जानकार है। जिसने LLB की डिग्री ले ली हो वह लॉयर कहलाता है। जैसे टीचिंग की जानकारी रखने वाला टीचर कहलाता है। वैसे ही कानून का जानकारी रखने वाला लॉयर कहलाता है। इसे किसी भी कोर्ट में केस लड़ने की अनुमति नहीं होती है। 

एडवोकेट (अधिवक्ता):-

 जिसे कोर्ट में बोलने का अधिकार हमारी तरफ से दे दिया गया हो उसे एडवोकेट कहते हैं। एडवोकेट को हिंदी में अधिवक्ता कहते हैं अर्थात आधिकारिक वक्ता। जब एक लॉयर लॉ की डिग्री लेने के बाद अपना नामांकन (enrolment) अपने राज्य की बार काउंसल में बार काउंसल ऑफ इंडिया (BCI) के नियम के अनुसार करवाता है तो वो लॉयर से अधिवक्ता बन जाता है। उसे किसी पीड़ित पक्ष की तरफ से कोर्ट में केस लड़ने की अनुमति मिल जाती है। सीधे शब्दों में कहें तो, जब एक लॉयर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) का एग्जाम पास कर लेता है तो वह एडवोकेट कहलाता है। अर्थात उसे किसी भी कोर्ट में बोलने का अधिकार मिल जाता है। वैसे ‘एडवोकेट’  इंग्लिश में एक verb भी है जिसका अर्थ है पक्ष लेना।

बैरिस्टर (Barrister):-  

यदि यही लॉ की डिग्री आप इंग्लैंड से प्राप्त करते हैं आप  बैरिस्टर कहलाते हैं। जैसे महात्मा गाँधी ने लॉ की डिग्री इंग्लैंड से प्राप्त की थी इसलिए वे बैरिस्टर कहलाते थे। यानि बैरिस्टर एक तरह से वकील का ही प्रकार होता है जो कि विदेश से लॉ की डिग्री ले कर आता है और अपने देश में आकर अपना रजिस्ट्रेशन BCI में करवाकर किसी न्यायालय में अपनी प्रैक्टिस करता है।

लोक अभियोजक (Public Prosecutor):- 

यदि कोई एडवोकेट राज्य सरकार की तरफ से पीड़ित का पक्ष लेता है अथवा केस लड़ता है तो वह लोक अभियोजक (Public Prosecutor) कहलाता है। इसे बोलचाल की भाषा में सरकारी वकील भी कहते हैं। Cr.P.C. के सेक्शन 24 में लोक अभियोजक के बारे में बताया गया है। वास्तव में यह एक ऐसा व्यक्ति है जिसे आपराधिक मामलों में राज्य की ओर से पीड़ितों के मामलों का प्रतिनिधित्व करने के लिए सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है। सरकार इसे वेतन व सरकारी सुविधाए जो की सरकारी नौकरी वालों को मिलती है वो सब देती है। राज्य सरकार समय समय पर लोक अभियोजक की भर्ती निकालती रहती है। 

प्लीडर (Pleader):-

यदि यही एडवोकेट जब  प्राइवेट पक्ष की तरफ से कोर्ट में केस करता है तो प्लीडर कहलाता है। इसे अभिवचन कर्ता भी कहते हैं। अर्थात  प्लीडर वह व्यक्ति होता है जो वादी (मुवक्किल) की ओर से अदालत में याचिका दायर करता है। और उसकी पैरवी करता है।

महाधिवक्ता (Advocate General) :- 

यही यही एडवोकेट जब राज्य सरकार की तरफ से राज्य का केस लड़ने के लिए नियुक्त किया जाता है तो यह एडवोकेट जनरल अर्थात महाधिवक्ता कहलाता है। एक एडवोकेट जनरल  राज्य सरकार का कानूनी सलाहकार भी होता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165 में एक राज्य के लिए एक महाधिवक्ता का प्रावधान है।  राज्यपाल द्वारा महाधिवक्ता की नियुक्ति की जाती है। यह राज्य का सर्वोच्च विधि अधिकारी  होता है।

महान्यायवादी (Attorney General) :-

यदि यही व्यक्ति केंद्र सरकार की तरफ से कोर्ट में उसका पक्ष रखने के लिए नियुक्त किया जाता है तो वह एटॉर्नी जनरल महान्यायवादी कहलाता है। संविधान के अनुच्छेद 76 में भारत के महान्यायवादी के पद का प्रावधान है। वह देश का सर्वोच्च कानून अधिकारी होता है। इसकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होती है। जो व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश बनने की योग्यता रखता है, ऐसे किसी व्यक्ति को राष्ट्रपति महान्यायवादी के पद पर नियुक्त कर सकते हैं। यह सभी कानूनी मामलों में  केंद्र सरकार की सहायता के लिए जिम्मेदार होता है। इसके कार्यों में सहायता देने केलिए सॉलिसिटर जनरल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल होते हैं।

सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General) :- 

यदि कोई एडवोकेट एटॉर्नी जनरल का असिस्टेंट बन जाता है तो उसे सॉलिसिटर जनरल कहा जाता है। यह देश का दूसरा कानूनी अधिकारी होता है, जो एटॉर्नी जनरल की सहायता करता है। सॉलिसिटर जनरल को चार अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। ध्यान रहे सॉलिसिटर जनरल का पद संविधान भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त नहीं है। सॉलिसिटर जनरल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के पद केवल वैधानिक (statutory) हैं। 

सारांश 

एक विधि स्नातक व्यक्ति लॉयर कहलाता है। जब यह BCI का एग्जाम पास कर लेता है तो एडवोकेट कहलाता है और जब इंग्लैंड से लॉ डिग्री प्राप्त करता है तो बैरिस्टर कहलाता है। 

एक एडवोकेट लॉयर हो सकता है लेकिन एक लॉयर एडवोकेट नहीं हो सकता है। यही एडवोकेट जब सरकार की तरफ से पीड़ित का केस लड़ता है तो लोक अभियोजक कहलाता है। और जब प्राइवेट तौर पर पीड़ित का केस लड़ता है तो प्लीडर कहलाता है। यही एडवोकेट जब राज्य सरकार की तरफ से राज्य सरकार का केस लड़ता है तो एडवोकेट जनरल और जब केंद्र सरकार का केस लड़ता है तो एटॉर्नी जनरल कहलाता है। एटॉर्नी जनरल की सहायता करने वाले सॉलिसिटर जनरल कहलाते हैं। 

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