difference between bill and act

विधेयक और अधिनियम में अंतर

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Difference between Bill and Act 

नमस्कार… अंतरकोश में आपका स्वागत है। आज हम इस पोस्ट में विधेयक और अधिनियम में अंतर बताने जा रहे हैं। कानूनी और राजनीतिक संदर्भ में विधेयक (bill) अधिनियम (act) दो सामान्य शब्द हैं। अक्सर अख़बार और मीडिया में विधेयक और अधिनियम के बारे में चर्चा होती रहती है। लेकिन स्पष्ट व्याख्या न होने के कारण इनके बीच विभेद करना कठिन हो जाता है। कई लोग तो विधेयक और अधिनियम को एक ही मानते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। अधिनियम और बिल के बीच एक विशेष अंतर है। आइए इस आर्टिकल में जानते हैं कि एक विधेयक क्या होता है और एक अधिनियम क्या होता है और ये एक दूसरे से कैसे अलग हैं ? अच्छे से समझने के लिए पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें।

विधेयक क्या है? (What is Bill ?):- 

विधेयक अंग्रेजी के बिल (Bill) का हिन्दी रूपान्तरण है। विधेयक एक प्रस्ताव (proposal) होता है जिसे संसद द्वारा विधि का रूप दिया जाता है। अर्थात विधेयक एक प्रस्तावित कानून या एक मसौदा है जिसे संसद में चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जाता है। विधेयक किसी मंत्री या किसी गैर-सरकारी सदस्य द्वारा संसद में प्रस्तुत किया जा सकता है। विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होने तथा राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद कानून बन जाता है। विधेयक भी दो तरह के होते हैं 1. सार्वजनिक 2. असार्वजनिक विधेयक।

अधिनियम क्या है?( What is Act ?):-

संसद द्वारा पारित किसी कानून या विधि को अधिनियम कहते हैं। वास्तव में जब कोई बिल संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है तो वह अधिनियम (एक्ट) बन जाता है। जिसे एक निश्चित तिथि को पूरे देश या देश के कुछ क्षेत्रों पर लागू कर दिया जाता है। एक बार जब यह अधिनियम लागू हो जाता है, तो इसे केवल दूसरे अधिनियम को पारित करके बदला या रद्द किया जा सकता है। इसलिए, एक अधिनियम या तो एक नया कानून बना सकता है या मौजूदा कानून को बदल सकता। हर विधेयक जरूरी नहीं की अधिनियम में बदल जाये।अगर सहमति नही बनती है तो वो विधेयक ,विधेयक ही रह जाता है।

संक्षेप में जब सरकार द्वारा किसी विषय पर कोई कानून बनाया जाता है तो  इसके लिए सबसे पहले उसका प्रारूप तैयार किया जाता है और फिर इसे संसद में पेश किया जाता है। जब इसे संसद में पेश किया जाता है, तो इसे विधेयक के नाम से जाना जाता है। जब यह विधेयक संसद के प्रत्येक सदन में पास हो जाता है और राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है तो  इसे अधिनियम कहा जाता है।

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