difference concrete roads vs asphalt roads

CONCRETE ROADS vs. ASPHALT ROADS

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नमस्कार … अंतरकोश में आपका स्वागत है। आज हम इस लेख में आपको कंक्रीट और एस्फाल्ट से बनी सड़कों के बीच अंतर बताने जा रहे हैं। यातायात के सभी साधनों में सड़कों का महत्त्व सर्वाधिक है। केवल सड़क ही ऐसा माध्यम है जो प्रत्येक गाँव को तथा जन-जन को आपस में जोड़ता है। यात्रा करते समय आपको मुख्यतः दो तरह की सड़कें दिखायी देती होंगी, काली और सफेद या ग्रे रंग की। एस्फाल्ट से बनी सड़कें काले रंग की होती हैं। वहीं दूसरी ओर कंक्रीट से बनी सड़के सफेद अथवा ग्रे रंग की होती हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिरकार कंक्रीट और एस्फाल्ट से बनी सड़कों में अंतर क्या है? आखिर सरकार क्यों ये दो तरह की सड़कें बनाती है। सड़कें कंक्रीट से बनायी जाएँ या एस्फाल्ट से इस बात को लेकर पर्यावरणविदों, इंजीनियरों और कार निर्माताओं के बीच लंबे समय से बहस चल रही है। आइये देखते हैं इन दोनों सड़कों में क्या अंतर है और वे कौन से कारण हैं जिन्होंने इसे बहस का मुद्दा बना दिया है।

एस्फाल्ट सड़कें

एस्फाल्ट (Asphalt) को डामर भी कहते हैं। यह एक चिपचिपा, काला और गाढ़ा तरल या अर्ध-तरल पदार्थ होता है, जिसे कच्चे तेल से प्राप्त किया जाता है। यह प्राकृतिक रूप से भी मिलता है। इसमें सीमेंट के समान जोड़ने की क्षमता होती है। इसका मुख्य घटक बिटुमेन (तारकोल सदृश पदार्थ) होता है। इसका प्रयोग सड़क निर्माण, रनवे निर्माण इत्यादि में होता है। एस्फाल्ट (डामर) कंक्रीट की तुलना में सस्ता है और डामर से सड़क बनाने में कम समय लगता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह हर स्थिति के लिए आदर्श है। एस्फाल्ट निर्मित सड़कें मौसम के प्रति संवेदनशील होती है। भारी बारिश और अधिक ठंड से ये क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। जगह-जगह गड्ढे बन जाते हैं जो अनेक सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। एस्फाल्ट सड़कों में गड्ढे होना आम बात है। इसलिए इनका रखरखाव भी अधिक करना पड़ता है। एस्फाल्ट सड़कों की औसत उम्र 15 साल होती है और इस अवधि में भी इनकी 4-5 बार मरम्मत करनी पड़ती है। किंतु एस्फाल्ट सड़कों के जल्दी गड्ढे पड़ने और टूटने का कारण भूमि की प्रकृति भी है। उत्तर भारत की अधिकांश मृदा जलोढ़ मृदा है जो मुलायम और नमी युक्त होती है। यहाँ की मृदा में चूना की मात्रा अधिक पायी जाती है जिस कारण सड़कों में गड्ढे पड़ जाते हैं कई बार तो बरसात के मौसम में सड़कें ही जमीन में धँस जाती हैं। जबकि दक्षिण भारत का अधिकाँश क्षेत्र पठारी है। यहाँ की भूमि ठोस और कठोर है जिस कारण यहाँ की सड़कें में गड्ढे कम पड़ते हैं टूटती कम है और लंबे समय तक चलती है। एस्फाल्ट सड़कों की कमियों को देखते हुए ही सड़कों को कंक्रीट से बनाया जाने लगा। आइए देखते हैं कंक्रीट सड़कें कैसी होती हैं? 

कंक्रीट सड़कें  

कंक्रीट की सड़कें एस्फाल्ट सड़कों की तुलना में अधिक टिकाऊ और मजबूत होती हैं। इन्हें बार बार मरम्मत की आवश्यकता नहीं पड़ती। इनका जीवनकाल भी अधिक लम्बा है। कंक्रीट सड़कों की औसत उम्र 25 साल होती है। ये सड़कें पर्यावरण के अनुकूल है अर्थात कंक्रीट सड़कों पर मौसमी क्रियायों जैसे धूप, वर्षा आदि का प्रभाव नहीं पड़ता। जिस कारण से इनमें गड्ढे पड़ना या टूटने जैसी समस्या नहीं आती। कंक्रीट सड़कों में घर्षण कम लगता है जिस कारण से वाहनों में तेल की 15 % तक खपत कम हो जाती है। किन्तु इन्हें बनाने में लागत अधिक आती है। साथ ही उच्च तापमान होने पर जल्दी गर्म हो जाती हैं जिसका परिणाम यह होता है कि इन पर चलने वाले वाहनों के टायर फटने लगते हैं। और दुर्घटना हो जाती है। ताप में परिवर्तन से उत्पन्न प्रसरण अथवा सिकुड़न के प्रभाव को कम करने के लिए सड़कों में निर्धारित दूरी पर संधियाँ दी जाती हैं। 

एस्फाल्ट सड़कों और कंक्रीट सड़कों में अंतर

■ जब भी कंक्रीट और डामर सड़कों के बीच अंतर की बात करते हैं तो स्थायित्व को मुख्य अंतर के रूप में देखा जाता है। डामर सड़कों की तुलना में कंक्रीट की सड़कें अधिक टिकाऊ और मजबूत होती हैं।

■ कंक्रीट की सड़कों का जीवनकाल डामर सड़कों की तुलना में अधिक है। कंक्रीट सड़कों का औसत जीवन 25 साल है जबकि डामर सड़कों का औसत जीवन 15 साल है। 

■ डामर सड़कों की तुलना में कंक्रीट सड़कों के लिए मरम्मत की आवश्यकता बहुत कम होती है।

■ कंक्रीट सड़कों में गड्ढे कम पड़ते हैं और टूटती भी बहुत कम है जबकि डामर सड़कें अधिक टूटती हैं और जगह-जगह गड्ढे बन जाते हैं। हालांकि सरकार एस्फाल्ट सड़कों को और अधिक मजबूत बनाने के लिए एस्फाल्ट में वेस्ट प्लास्टिक मिक्स करके सड़क निर्माण की दिशा में प्रयास कर रही है।

■ मौसम की स्थिति कंक्रीट सड़कों की तुलना में डामर सड़कों को अधिक नुकसान पहुँचाने के लिए उत्तरदायी है।

■ डामर सड़कों की तरह कंक्रीट की सड़कें तेल रिसाव से क्षतिग्रस्त नहीं होती हैं।

■ डामर सड़कों का रखरखाव आसान है। डामर सड़क के एक हिस्से का रखरखाव संभव है। इसके अलावा, इन सड़कों को फिर से स्तरित (Layered) किया जा सकता है, जो कंक्रीट सड़कों के साथ इतना आसान नहीं है।

■ कंक्रीट सड़कों में डामर सड़कों की तुलना में अधिक लागत लगती है। इसके अलावा कंक्रीट सड़क की तुलना में डामर सड़क बनाने में कम समय लगता है।

■ सुरक्षा के संबंध में देखें तो डामर सड़कें वाहनों के लिए बेहतर सुरक्षा प्रदान करती हैं। कंक्रीट सड़कों की तुलना में, डामर सड़कों में बेहतर Skid resistance होता है। 

■ पर्यावरणीय पहलुओं को देखें तो कंक्रीट सबसे अच्छा विकल्प है। क्योंकि अधिक ताप पर डामर सड़कें पिघलने से ग्रीन हाउस गैसों का उत्पादन होता है।

इस तरह आपने कंक्रीट और एस्फाल्ट सड़कों के बारे में पढ़ा और जाना कि इनमें क्या अंतर होता है। दोनों ही सड़कों के अपने-अपने लाभ और हानियाँ हैं। यह कहना मुश्किल है कि कौन सी सड़कें ज्यादा अच्छी होती हैं। सुविधा और लागत को ध्यान में रखते हुए सड़कें बनाई जाती हैं। किन्तु फिर भी यदि देश के प्रत्येक गाँव में पक्की सड़क पहुँचाना है तो हमें कंक्रीट सड़कों निर्माण करना चाहिए भले ही लागत अधिक आए। 

उम्मीद है कि आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसन्द आयी होगी और विभिन्न प्रकार के एटीएम में अंतर भी स्पष्ट हो गया होगा। आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी कैसी लगी? हमें कॉमेंट करके अवश्य बताएँ और अपने दोस्तों को भी शेयर करें। यदि आपके मन में कोई प्रश्न अथवा शंका है तो आप हमसे पूछ सकते हैं। हम आपके प्रश्नों अथवा शंका का समाधान करने का पूरा प्रयास करेंगे। “धन्यवाद”

इस  प्रकार के और अंतर जानने के लिए “www.antarkosh.com पर visit करें।

13 thoughts on “CONCRETE ROADS vs. ASPHALT ROADS

  1. अति-सुंदर एवम् स्तरीय जानकारी । भविष्य में भी ऐसे ही लेख के लिए आशावान हूँ ।

  2. अति-सुंदर एवम् स्तरीय जानकारी । भविष्य में भी ऐसे ही लेख के लिए आशावान हूँ ।

  3. Dear Sharad , thanks a lots for the valueable informations…. it’s really very important to know and understand , very usefull information provide by you .

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