आमंत्रण और निमंत्रण में अंतर

आमंत्रण और निमंत्रण दोनों ही संस्कृत के शब्द हैं। अर्थात ये तत्सम शब्द हैं। अंतर समझने के लिए इन दोनों शब्दों की संरचना को समझना जरूरी है। इनकी संरचना में मूल शब्द ‘मंत्र’ है। जिसका अर्थ होता है आह्वान करना या बुलाना। जैसे- पूजा के दौरान मंत्र उच्चारण करते हैं। इसका अर्थ है बुलाना अर्थात देवी देवताओं को आहूत करना। किंतु ‘आ’ और ‘नि’ उपसर्ग के लगने के कारण इन दोनों के भावार्थ में अंतर आ जाता है।