MLA और MLC में अंतर

किसी राज्य का शासन चलाने के लिए उसका अपना एक विधानमंडल (legislature) होता है। प्रत्येक राज्य का विधानमंडल राज्यपाल और उसके सदनों से मिलकर बनता है। संविधान का अनुच्छेद 168 प्रत्येक राज्य में एक विधानमंडल की व्यवस्था करता है। इस अनुच्छेद के तहत  विधानमंडल में राज्यपाल के अतिरिक्त विधानमंडल के एक या दोनों सदन शामिल है । इसी अनुच्छेद के अनुसार कुछ राज्यों जैसे  बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में द्विसदनीय विधानमंडल (bicameral legislature) की व्यवस्था की गई है और शेष राज्यों में एक सदनीय विधानमंडल की व्यवस्था है। जिन राज्यों में दो सदन हैं  वहाँ एक सदन को विधानसभा तथा दूसरे को विधान परिषद कहते हैं।  जिन राज्यों में एक सदन है उसका नाम विधानसभा है। विधानसभा के सदस्यों को MLA तथा विधानपरिषद के सदस्यों को MLC कहते हैं। इस तरह MLC केवल उन्हीं राज्यों में होते हैं जहाँ विधानपरिषद होती है। इनके निर्वाचन, न्यूनत्तम आयु, कार्यावधि आदि में काफी अंतर होता है। आइए देखते हैं MLA और MLC में मुख्य अन्तर क्या हैं?